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कान्हा में जंगली भैंसा पुनर्स्थापन की शुरुआत, 45 साल बाद लौटेगी विलुप्त प्रजाति

By Sonu bisen

Published on: April 28, 2026

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कान्हा में जंगली भैंसा पुनर्स्थापन की शुरुआत, 45 साल बाद लौटेगी विलुप्त प्रजाति

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जंगली भैंसा पुनर्स्थापन के तहत मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। करीब 45 वर्षों बाद सूपखार रेंज में जंगली भैंसे फिर से बसाए जाएंगे। 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अभियान की शुरुआत करेंगे। इस दौरान असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए 4 जंगली भैंसों को जंगल में छोड़ा जाएगा।

असम और मध्य प्रदेश का संयुक्त प्रयास

यह जंगली भैंसा पुनर्स्थापन अभियान मध्य प्रदेश और असम सरकार के सहयोग से चलाया जा रहा है। इस योजना के तहत कुल 50 एशियाई जंगली भैंसों को कान्हा में बसाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में 4 भैंसों को लाया गया है, जबकि बाकी जानवर चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरित किए जाएंगे।

कठिन प्रक्रिया के बाद हुआ स्थानांतरण

इस परियोजना के तहत काजीरंगा से भैंसों को पकड़ने, क्वारंटाइन में रखने और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद 25 अप्रैल को 2000 किलोमीटर लंबी यात्रा शुरू की गई। पूरे सफर में विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की निगरानी रखी गई, ताकि जानवरों को कोई तनाव न हो।

पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगा लाभ

जंगली भैंसा पुनर्स्थापन का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता को बढ़ाना है। ये भैंसे घास के मैदानों में चरकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करेंगे। इससे कान्हा के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

1979 के बाद पहली बार वापसी

गौरतलब है कि कान्हा के सूपखार क्षेत्र में जंगली भैंसों को आखिरी बार 1979 में देखा गया था। इसके बाद शिकार, बीमारियों और आवास की कमी के कारण यह प्रजाति यहां से पूरी तरह खत्म हो गई। अब इस परियोजना के जरिए इन्हें फिर से बसाने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों की उम्मीदें और भविष्य की योजना

विशेषज्ञों का मानना है कि कान्हा का वातावरण जंगली भैंसों के लिए अनुकूल है। यहां पर्याप्त जल स्रोत और घासभूमि मौजूद हैं। यदि यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में यहां स्थायी आबादी विकसित हो सकती है।

निष्कर्ष

जंगली भैंसा पुनर्स्थापन मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न केवल विलुप्त प्रजातियों को नया जीवन मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी मजबूत होगा।

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Sonu bisen

मेरा नाम सोनू बिसेन है। मैं एक लेखक हु और TazaSanket.com पर लेखन का काम करता हूं। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मैं मध्य प्रदेश, विशेष रूप से बालाघाट ज़िले की ताज़ा एवं क्रिकेट न्यूज़ और विश्वसनीय लोकल खबरें पाठकों तक पहुँचाने का कार्य करता हूं

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