Kheti News: रबी सीजन में फूलगोभी की खेती किसानों के लिए अच्छी आय का विकल्प हो सकती है। हालांकि बेहतर उत्पादन के लिए बीज का चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी है। अलग-अलग किस्मों की अपनी विशेषताएं होती हैं, इसलिए खेत की स्थिति, मौसम और फसल की अवधि को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
प्रमुख हाइब्रिड किस्मों की खासियत
बड़े स्तर पर खेती के लिए सेमिनिस की गिरिजा और फुटेजा किस्मों का उल्लेख किया गया है। इन किस्मों में सेल्फ-ब्लांचिंग की विशेषता बताई गई है। इसमें पत्तियां फूल को ढक लेती हैं, जिससे फूल पर सीधी धूप और पाले का प्रभाव कम होता है। इनकी फसल करीब 60 से 65 दिन में तैयार होने तथा फूल का वजन लगभग 1 से 1.5 किलो तक होने की जानकारी दी गई है। इनके फूल ठोस और मजबूत होते हैं, जिससे परिवहन के दौरान नुकसान कम हो सकता है।
सकाटा की वाइट एक्सेल और सटा 65 किस्में भी फूलगोभी की खेती के लिए बताई गई हैं। इनका फूल डोम शेप का होता है। मध्यम से भारी मिट्टी में इनका उपयोग किया जा सकता है। इन किस्मों में फील्ड होल्डिंग की क्षमता बताई गई है, जिससे बाजार भाव अनुकूल नहीं होने पर फसल को कुछ समय खेत में रखने की सुविधा मिल सकती है।
मौसम और रोग संबंधी जोखिम को ध्यान में रखते हुए सिंजेंटा CFL 15-22 का भी उल्लेख किया गया है। इसके फूल का वजन करीब 1 से 1.2 किलो बताया गया है। अधिक नमी वाले खेतों में इसके बेहतर प्रदर्शन और ब्लैक रॉट रोग के कम प्रभाव की जानकारी दी गई है।
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पछेती फसल और स्थानीय किस्मों के विकल्प
जनवरी के अंत या फरवरी में कटाई वाली पछेती फसल के लिए पूसा स्नो बॉल 16 को एक विकल्प बताया गया है। इसकी फसल तैयार होने में करीब 90 से 100 दिन लगते हैं, जबकि फूल का वजन लगभग 1.5 से 2 किलो तक बताया गया है।
स्थानीय विकल्पों में माघी और अगनी किस्मों का भी उल्लेख किया गया है। ये किस्में स्थानीय मिट्टी और वातावरण के अनुरूप ढली हुई बताई गई हैं।
नर्सरी में पौध गलन से बचाव
फूलगोभी की नर्सरी में डैंपिंग ऑफ यानी पौध गलन की समस्या से बचाव के लिए बीज उपचार पर ध्यान देना जरूरी बताया गया है। बुवाई से पहले बीजों को साफ या बाविस्टिन जैसे फफूंदनाशक से उपचारित करने की सलाह दी गई है। स्रोत के अनुसार इसकी मात्रा 2 ग्राम दवा प्रति किलो बीज रखी जानी चाहिए।
कुल मिलाकर, फूलगोभी की खेती में किस्म का चुनाव फसल की अवधि, खेत की स्थिति और किसान की जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। सही बीज के साथ शुरुआती नर्सरी प्रबंधन पर ध्यान देने से फसल की बेहतर शुरुआत सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
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