Follow Channel
धान की जड़ों में लाल कीड़ा बना रहा है फसल कमजोर, जानें पूरा इलाज - Taza Sanket
बालाघाट न्यूज़ मध्य प्रदेश क्रिकेट कृषि भारत शिक्षा सरकारी योजना खेल धर्म

धान की जड़ों में लाल कीड़ा बना रहा है फसल कमजोर, जानें पूरा इलाज

By Sonu bisen

Published on: August 16, 2026

Follow Us

धान की जड़ों में लाल कीड़ा बना रहा है फसल कमजोर, जानें पूरा इलाज

---Advertisement---

खेत में भरपूर यूरिया, डीएपी और अन्य खाद डालने के बावजूद अगर धान की फसल में नए कल्ले नहीं निकल रहे और पौधे पीले पड़ रहे हैं, तो इसके पीछे मिट्टी के भीतर छिपा एक कारण हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल में लाल कीड़ा इसका सबसे बड़ा और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला कारण है।

जड़ों को नुकसान पहुंचाता है लाल कीड़ा

धान के पौधे में कल्ले निकलने की प्रक्रिया सीधे तौर पर उसकी नई सफेद जड़ों के विकास पर निर्भर करती है। खेत में लगातार पानी भरे रहने या कच्ची गोबर खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में करीब एक से डेढ़ इंच लंबे लाल रंग के कीड़े पनप जाते हैं। यह कीड़ा जड़ों के पास मिट्टी में जमकर नई सफेद जड़ों को बनने से रोकता है और उनका रस चूस लेता है, जिससे जड़ें सड़कर काली पड़ जाती हैं। नतीजतन पौधा मिट्टी से पोषण और पानी नहीं ले पाता और खाद डालने के बावजूद उसका असर तने तक नहीं पहुंच पाता।

जिंक की कमी भी बनती है वजह

कई बार खेत में लाल कीड़ा न होने पर भी पौधे की बढ़वार रुकी रहती है। फसल का पीला पड़ना और पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखना जिंक की कमी का संकेत होते हैं, जिसे खैरा रोग कहा जाता है। जिंक पौधे में ऑक्सिन हार्मोन बनाने में मदद करता है, जो तने से नई शाखाएं और कल्ले निकालने का काम करता है। जिंक की कमी होने पर यह हार्मोन नहीं बन पाता और पौधा बौना रह जाता है।

उपचार के लिए जरूरी सामग्री

एक एकड़ खेत के लिए 30 से 35 किलोग्राम यूरिया लेकर उसमें फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 0.4 प्रतिशत जैसे दानेदार कीटनाशक को मिलाया जा सकता है। इससे लाल कीड़े का नियंत्रण होता है। इसके साथ ह्यूमिक एसिड और माइकोराइजा मिलाने से मिट्टी मुलायम बनती है और नई जड़ों का विकास तेज होता है। सीवीड एक्सट्रैक्ट पौधे की कोशिकाओं के विभाजन में मदद करता है, जबकि 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट (33 प्रतिशत) जिंक की कमी को पूरा करता है।

छिड़काव के समय बरतें यह सावधानी

इस मिश्रण का उपयोग करते समय खेत में ज्यादा पानी भरा नहीं होना चाहिए, केवल हल्की नमी या करीब एक इंच पानी पर्याप्त है। खाद-दवा डालने के बाद खेत का पानी 48 से 72 घंटे तक बाहर नहीं निकलने देना चाहिए, ताकि जड़ें इसे पूरी तरह सोख सकें। साथ ही माइकोराइजा एक जीवित फंगस होने के कारण इसके साथ किसी भी रासायनिक फफूंदनाशक को नहीं मिलाना चाहिए।

read also: बालाघाट में विभाजन विभीषिका दिवस पर निकला मौन जुलूस, तिरंगा लेकर शामिल हुए नागरिक और विद्यार्थी

Sonu bisen

मेरा नाम सोनू बिसेन है। मैं एक लेखक हु और TazaSanket.com पर लेखन का काम करता हूं। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मैं मध्य प्रदेश, विशेष रूप से बालाघाट ज़िले की ताज़ा एवं क्रिकेट न्यूज़ और विश्वसनीय लोकल खबरें पाठकों तक पहुँचाने का कार्य करता हूं

Leave a Comment