Kheti News: गेहूं की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए सही वैरायटी का चुनाव महत्वपूर्ण माना जाता है। किसानों को अपने क्षेत्र, उपलब्ध सिंचाई, बुवाई समय और रोगों की स्थिति को ध्यान में रखकर बीज का चयन करना चाहिए। इसी आधार पर गेहूं की किस्मों में DBW 303, HI 1650 और HI 8759 का उल्लेख किया गया है।
गेहूं की किस्म चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें
गेहूं की कोई भी वैरायटी हर क्षेत्र में समान प्रदर्शन करे, यह जरूरी नहीं है। अलग-अलग स्थानों की जलवायु और खेती की परिस्थितियों के अनुसार किस्मों का प्रदर्शन बदल सकता है। इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म का चयन करने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा सिंचाई की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। जिस किसान के पास सीमित पानी है, उसे कम सिंचाई में बेहतर प्रदर्शन करने वाली किस्म का चुनाव करना चाहिए। वहीं पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध होने पर दूसरी किस्मों पर विचार किया जा सकता है। रोग प्रतिरोधकता को भी बीज चयन का एक प्रमुख आधार बताया गया है।
किसी नई गेहूं की वैरायटी को तैयार करने में कई वर्षों की प्रक्रिया शामिल होती है। अलग-अलग पौधों का चयन, क्रॉसिंग और कई पीढ़ियों तक परीक्षण के बाद किस्म को विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन के लिए भेजा जाता है। इसके बाद उसकी उपयुक्तता के आधार पर आगे बढ़ाया जाता है।
DBW 303 और HI 1650 की खासियत
DBW 303 को करण वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है। दी गई जानकारी के अनुसार इसकी अवधि लगभग 145 से 150 दिन बताई गई है। इसमें ब्लैक रस्ट, ब्राउन रस्ट और येलो रस्ट के प्रति रोग प्रतिरोधकता का उल्लेख किया गया है। इसकी बालियां लंबी बताई गई हैं और इसकी बुवाई 20 अक्टूबर से 20 नवंबर के बीच करने की जानकारी दी गई है।
बीज दर को लेकर स्रोत में अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार 40 से 55 किलोग्राम प्रति एकड़ तक का उल्लेख किया गया है। हेक्टेयर के लिए 100 से 120 किलोग्राम बीज दर बताई गई है। इसे मध्य प्रदेश के लिए भी अनुशंसित बताया गया है।
HI 1650 को दूसरी प्रमुख किस्म के रूप में बताया गया है। इसके उत्पादन और मंडी में मिलने वाले भाव को लेकर चर्चा की गई है। स्रोत के अनुसार करीब तीन सिंचाई उपलब्ध होने पर किसान इस किस्म पर विचार कर सकते हैं। अधिक पानी की स्थिति में अन्य किस्मों का चयन करने की बात कही गई है।
HI 8759 यानी पूसा तेजस पर भी जोर
HI 8759 को पूसा तेजस के नाम से भी जाना जाता है। इसे एक मध्यम अवधि की किस्म बताते हुए लगभग 125 से 130 दिन में पकने की जानकारी दी गई है। स्रोत के अनुसार इसकी ऊंचाई ज्यादा नहीं होती और आड़े होने की समस्या कम बताई गई है।
इस किस्म में येलो रस्ट, ब्लैक रस्ट और ब्राउन रस्ट के प्रति रोग प्रतिरोधकता का भी उल्लेख किया गया है। पर्याप्त सिंचाई और उचित खाद-उर्वरक प्रबंधन की स्थिति में बेहतर उत्पादन मिलने की बात कही गई है।
स्रोत में मध्य प्रदेश के किसानों के लिए HI 8759 को विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है। साथ ही गेहूं की किस्मों का चयन करते समय केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि पानी की उपलब्धता, क्षेत्र और रोग प्रतिरोधकता को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है।
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