Kheti News: धान की फसल से अच्छी पैदावार लेने के लिए सही समय पर स्प्रे करना बेहद जरूरी माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जब धान की फसल 50 से 52 दिन की अवस्था में पहुंच जाए और उसमें झंडा पत्ती निकल आए, तो यह धान की फसल स्प्रे करने का सबसे उपयुक्त समय होता है। इस अवस्था को गभोट अवस्था भी कहा जाता है, जिसमें पौधे में बालियां आने की प्रक्रिया शुरू होने वाली होती है।
गभोट अवस्था में स्प्रे का महत्व
जब धान के पौधे में झंडा पत्ती यानी आखिरी पत्ती निकल आती है, तभी किसानों को पोषक तत्वों का स्प्रे करना चाहिए। सही समय पर यह स्प्रे करने से बालियां लंबी और मोटी निकलती हैं, दाने वजनदार भरते हैं और फसल में काले दाने, काली पानी, सफेद दाने या टिड्डा-पंखी जैसी समस्याएं कम देखने को मिलती हैं।
किन उत्पादों का करें इस्तेमाल
इसके लिए तीन उत्पादों की जरूरत होती है। एनपीके 0:52:34 एक किलोग्राम प्रति एकड़, थायोमेथॉक्सम 25 प्रतिशत (100 ग्राम प्रति एकड़) और बोरोन 20 प्रतिशत (150 ग्राम प्रति एकड़) की मात्रा ली जाती है। एनपीके 0:52:34 में 52 प्रतिशत फास्फोरस और 34 प्रतिशत पोटाश होती है, जो बालियां निकलने की अवस्था में फसल को मजबूती देती है। बोरोन परागन क्रिया को बढ़ावा देकर दानों को भरपूर भरने में मदद करता है, जबकि थायोमेथॉक्सम कीटनाशक एफिड, मच्छर, भुनका, पंखी और टिड्डा जैसे कीटों को नियंत्रित करता है।
घोल तैयार करते समय बरतें सावधानी
स्प्रे तैयार करते समय एनपीके 0:52:34 का घोल अलग बाल्टी में और बोरोन-थायोमेथॉक्सम का घोल अलग बाल्टी में बनाना चाहिए। दोनों को एक साथ मिलाने से एनपीके का घोल ठंडा होने के कारण जम सकता है, जिससे स्प्रे का असर कम हो जाता है। एक एकड़ खेत के लिए करीब छह पंप पानी (25 लीटर वाले) की जरूरत होती है। पंप को आधा पानी से भरने के बाद तैयार घोल डालकर पूरा भरा जाता है और फिर फसल पर स्प्रे किया जाता है।
समय का रखें विशेष ध्यान
यह स्प्रे बालियां निकलने से करीब सात से आठ दिन पहले यानी फसल के 50 से 55 दिन की अवस्था में ही करना चाहिए। कई किसान बालियां निकलने के बाद स्प्रे करते हैं, जिससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता। सही अवस्था में समय पर धान की फसल स्प्रे करने से ही बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ती है।
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