balaghat news: बालाघाट जिले के खैरलांजी विकासखंड के ग्राम डोंगरिया में किसानों को वैज्ञानिक तरीके से रेशम उत्पादन करने की तकनीकों की जानकारी दी गई। केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ अभियान के तहत आयोजित कृषक प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय प्रदर्शन कार्यक्रम में कुल 53 रेशम कृषकों ने भाग लिया।
किसानों को दी गई वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक रेशम उत्पादन पद्धतियों से परिचित कराना और जिले में रेशम उत्पादन के विस्तार के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान रेशमकीट अंडों की ब्लैक बॉक्सिंग, चॉकी पालन गृह के कीटाणुशोधन तथा चॉकी रिअरिंग केंद्र में उचित तापमान और सापेक्ष आर्द्रता बनाए रखने के बारे में जानकारी दी गई।
किसानों को शहतूत के पौधों के बीच उचित दूरी रखने के महत्व के साथ मोल्टिंग के दौरान बेड डिसइंफेक्शन की आवश्यकता भी समझाई गई। रेशमकीटों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी सावधानियों तथा शहतूत की खेती और रेशमकीट पालन में कीट एवं रोग प्रबंधन की तकनीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
क्षेत्रीय प्रदर्शन के जरिए किसानों से सीधा संवाद
मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहते हुए क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को तकनीकों की जानकारी दी गई।
किसानों के साथ सीधे संवाद के जरिए रेशमकीट पालन में होने वाले नुकसान को कम करने, उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने तथा रेशम उत्पादन को टिकाऊ एवं लाभकारी आजीविका के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
रेशम कृषकों को सशक्त बनाने पर जोर
कार्यक्रम का आयोजन नवीन चंद्र रेड्डी, वैज्ञानिक-बी और संतोष कुमार ठाकरे, एसटीए, केंद्रीय रेशम बोर्ड, बीएसएमटीसी, बालाघाट द्वारा रेशम विभाग, बालाघाट के समन्वय से किया गया।
इस दौरान जिला नोडल अधिकारी सुरेंद्र चिचाम, प्रक्षेत्र अधिकारी विजय नंदनवार, स्थायी कर्मी सुखचंद चौधरी सहित रेशम कृषक मौजूद रहे।
मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 के माध्यम से बालाघाट जिले में वैज्ञानिक और तकनीक आधारित रेशम उत्पादन को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने तथा रेशम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।
read more: बालाघाट में 27 अगस्त को अटल पेंशन योजना पर कार्यशाला, जानें पंजीयन और पेंशन से जुड़ी जरूरी जानकारी
Leave a Comment