श्री श्री रवि शंकर की प्रेरणा से शुरू हुआ आर्ट ऑफ लिविंग अभियान आज 180 देशों तक पहुंच चुका है। संस्था के अनुसार, इसके जरिए तनाव कम करने, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और शांति से जुड़े कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
श्री श्री रवि शंकर का आध्यात्मिक झुकाव बचपन से ही दिखाई देने लगा था। चार वर्ष की उम्र में उन्होंने भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ कर अपने शिक्षकों को प्रभावित किया था।
बचपन से ही उनका ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान की ओर विशेष रुझान रहा। वे दुनिया को अपना परिवार मानने और लोगों के लिए कुछ करने की भावना व्यक्त करते थे।

सुदर्शन क्रिया से शुरू हुई नई पहल
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की।
1981 की शरद ऋतु में कर्नाटक के शिमोगा में 10 दिनों की गहन ध्यान और मौन साधना के दौरान सुदर्शन क्रिया के जन्म का उल्लेख मिलता है।
सुदर्शन क्रिया एक श्वसन प्रक्रिया है, जिसे तनाव कम करने और शारीरिक, भावनात्मक तथा मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने से जोड़ा गया है।
इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना हुई। संस्था के अनुसार, आज 35 हजार से अधिक शिक्षक सुदर्शन क्रिया के जरिए करोड़ों लोगों तक पहुंच रहे हैं।

शिक्षा से बदल रहा बच्चों का जीवन
श्री श्री रवि शंकर ने 24 वर्ष की उम्र में 180 बच्चों की शिक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी उठाई थी। समय के साथ यह पहल बड़े शिक्षा अभियान में बदल गई।
संस्था के अनुसार, आज 1200 से अधिक स्कूलों में एक लाख से ज्यादा बच्चों को शिक्षा दी जा रही है।
इनमें कई बच्चे देश के दूरदराज इलाकों से आते हैं और अपने परिवार की पहली शिक्षित पीढ़ी हैं।

गांवों में विकास और आत्मनिर्भरता पर जोर
ग्रामीण समुदायों के विकास के लिए ग्रामीण विकास कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके तहत स्वयंसेवकों ने 1000 से अधिक आदर्श गांव बनाने में योगदान दिया।
सौर ऊर्जा के जरिए 90 हजार से ज्यादा घरों में रोशनी पहुंचाने की पहल भी की गई।
युवाओं के लिए यूथ लीडरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया गया। इसके जरिए युवाओं को अपने क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए आगे आने के लिए तैयार किया गया।
किसानों और पर्यावरण के लिए काम

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल में किसानों को आत्मनिर्भर और कर्जमुक्त बनाने पर ध्यान दिया गया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए नदियों और जलाशयों के पुनर्जीवन का अभियान भी चलाया गया। संस्था के अनुसार, इन प्रयासों से खासकर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में लोगों को राहत मिली।
वृक्षारोपण और सफाई अभियानों के जरिए भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम किया गया।
जेलों में कैदियों तक पहुंचा कार्यक्रम

आर्ट ऑफ लिविंग के जेल कार्यक्रमों के माध्यम से दुनिया भर में आठ लाख से अधिक कैदियों तक पहुंचने की बात कही गई है।
कार्यक्रमों का उद्देश्य कैदियों को हिंसा और तनाव से बाहर निकलने में मदद करना रहा। कई प्रतिभागियों ने इन कार्यक्रमों के बाद अपने जीवन में बदलाव महसूस करने की बात कही।
अमेरिका के ‘यस फॉर स्कूल्स’ कार्यक्रम के जरिए हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को आपराधिक जीवन से दूर रखने का प्रयास किया गया।
युद्ध से लौटे सैनिकों के लिए पहल

युद्ध के बाद सामान्य जीवन में लौटने वाले सैनिकों के मानसिक तनाव को देखते हुए ‘प्रोजेक्ट वेलकम होम ट्रूप्स’ चलाया गया।
कार्यक्रम में शामिल सैनिकों में तनाव और घबराहट कम होने तथा मानसिक शांति बढ़ने की बात सामने आई।
कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि कार्यक्रम के बाद उन्हें रात में बेहतर नींद आने लगी और उन्होंने खुद को दोबारा समझने में मदद महसूस की।
संघर्षों में संवाद से समाधान की कोशिश
श्री श्री रवि शंकर ने कई राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों में बातचीत के जरिए समाधान खोजने की कोशिश की।
अयोध्या विवाद के दौरान उन्होंने विभिन्न समुदायों के लोगों के साथ संवाद किया। उनकी मध्यस्थता से सौहार्दपूर्ण समझौते की कोशिश हुई, जिसका दोनों पक्षों द्वारा स्वागत किए जाने का उल्लेख किया गया है।
कश्मीर में भी अलग-अलग वर्गों को साथ लाकर विश्वास और शांति कायम करने के प्रयास किए गए।
उत्तर पूर्व भारत में उनके प्रयासों से हजारों अलगाववादियों द्वारा हथियार छोड़कर अहिंसा का रास्ता अपनाने की बात कही गई है।

कोलंबिया में शांति प्रयास
कोलंबिया में श्री श्री रवि शंकर के शांति प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है। उनके प्रयासों के दौरान फार्क और कोलंबिया सरकार के बीच 52 वर्षों से चला आ रहा संघर्ष समाप्त होने की बात कही गई।
इराक, जॉर्डन और लेबनान में 2003 से कई शांति सम्मेलन और राहत शिविर आयोजित किए गए।
सीरिया में आईएस द्वारा कैद की गई 1000 से अधिक यजीदी महिलाओं के पुनर्वास में भी आर्ट ऑफ लिविंग की भूमिका बताई गई है।

मिले कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान
श्री श्री रवि शंकर को उनके मानवीय और शांति प्रयासों के लिए कई सम्मान मिले हैं।
उन्हें कोलंबिया, मंगोलिया, पैराग्वे और सूरीनाम के सर्वोच्च गैर-सैनिक सम्मानों के साथ भारत के पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने का उल्लेख है।
उन्हें दुनिया भर से 25 मानद डॉक्टरेट की उपाधियां भी प्रदान की गई हैं।
दुनिया को जोड़ने की कोशिश
आर्ट ऑफ लिविंग ने अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाने के लिए विश्व सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किए।
बेंगलुरु में हुए पहले विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में 150 से अधिक देशों ने भाग लिया। इसके बाद बर्लिन और नई दिल्ली में भी बड़े आयोजन हुए।
2016 में नई दिल्ली के आयोजन में 155 देशों से 357 लाख लोगों और 3662 कलाकारों के शामिल होने का उल्लेख किया गया है।
2023 में वाशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल पर हुए चौथे संस्करण में 180 देशों से 11 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।
आर्ट ऑफ लिविंग के कई ऐतिहासिक कार्यक्रमों को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिलने की जानकारी भी दी गई है।
श्री श्री रवि शंकर की पहल का घोषित उद्देश्य तनावमुक्त और हिंसामुक्त समाज बनाना है। संस्था शिक्षा, सेवा, पर्यावरण, ग्रामीण विकास और शांति से जुड़े अभियानों के जरिए इसी दिशा में काम करने का दावा करती है।
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