Balaghat News: बालाघाट स्थित प्राचीन संकट मोचन हनुमान मंदिर में गुरुवार को आयोजित रुद्र पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप के दुर्लभ दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस विशेष अवसर पर संत श्री श्री रविशंकर के शिष्य ब्रह्मचारी शिवतेश जी ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के आध्यात्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सत्ययुग से आधुनिक काल तक की यात्रा
उन्होंने बताया कि सत्ययुग में भगवान चंद्रमा ने भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी, जो भूमि से लगभग तीन फीट ऊंचा था। अध्ययन में यह भी सामने आया कि ज्योतिर्लिंग का पत्थर पृथ्वी पर उपलब्ध किसी भी धातु से निर्मित नहीं है। इतिहास में 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद इसके मूल अवशेषों को अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार ने दक्षिण भारत में सुरक्षित रखकर हजार वर्षों तक गुप्त पूजा की।
भविष्यवाणी और उसका साकार होना
वर्ष 1924 में कांची पीठ के शंकराचार्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती ने 100 वर्षों तक गुप्त पूजा और स्वतंत्र भारत में दर्शन की भविष्यवाणी की थी। वर्ष 2025 में यह भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई, जब 11 एकादश शिवलिंग देश भ्रमण पर निकले और बालाघाट पहुंचे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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