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धान की डीएसआर तकनीक को मिलेगा बढ़ावा, 5 हजार हेक्टेयर में सीधी बुवाई का लक्ष्य तय

By bhumendra bisen

Published on: June 14, 2026

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धान की डीएसआर तकनीक को मिलेगा बढ़ावा, 5 हजार हेक्टेयर में सीधी बुवाई का लक्ष्य तय

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रबी सीजन के सफल समापन के बाद कृषि विभाग ने खरीफ 2026 की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार विभाग का विशेष ध्यान धान की डीएसआर तकनीक को बढ़ावा देने पर है। किसानों की उत्पादन लागत कम करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और बेहतर उपज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलेभर में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आत्मा परियोजना और तकनीकी संस्थान के सहयोग से कृषि सखियों तथा चयनित किसानों को आधुनिक खेती की नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

क्या है धान की डीएसआर तकनीक?

विशेषज्ञों के अनुसार धान की डीएसआर तकनीक पारंपरिक रोपा पद्धति का आधुनिक विकल्प है। इस पद्धति में नर्सरी तैयार करने और धान की रोपाई करने की आवश्यकता नहीं होती। किसान सीधे खेत में बीजों की बुवाई कर सकते हैं। इससे श्रम, समय और उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।

इसके अलावा यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है। किसानों को कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने का अवसर मिलता है, जिससे खेती अधिक लाभकारी बन सकती है।

जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका

वर्तमान समय में जल संकट कृषि क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में धान की डीएसआर तकनीक जल संरक्षण के लिए प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही है। पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में इस पद्धति में काफी कम पानी की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भू-जल स्तर को संरक्षित करने में मदद मिलती है। साथ ही सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है, जिससे किसानों की आय में सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार का लक्ष्य

कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। जिले की 100 कृषि सखियों को अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रत्येक कृषि सखी को 50 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की सीधी बुवाई सुनिश्चित कराने का लक्ष्य सौंपा गया है। इस प्रकार पूरे जिले में लगभग 5 हजार हेक्टेयर भूमि को इस तकनीक के दायरे में लाने की योजना बनाई गई है।

आधुनिक कृषि यंत्रों की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को सुपर सीडर और सीड ड्रिल जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इन मशीनों के माध्यम से कम समय में अधिक क्षेत्र में बुवाई संभव है।

इसके परिणामस्वरूप श्रम लागत घटती है और खेती अधिक कुशल बनती है। साथ ही किसानों को समय की भी बचत होती है, जो खेती की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है।

खरीफ सीजन में बढ़ेगा तकनीकी खेती का दायरा

कृषि विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है ताकि वे बदलते समय के साथ खेती के आधुनिक तरीकों को अपना सकें।

निष्कर्ष

जल संरक्षण, कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण धान की डीएसआर तकनीक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। कृषि विभाग को उम्मीद है कि आने वाले खरीफ सीजन में धान की डीएसआर तकनीक का व्यापक उपयोग होगा और इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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