Kheti News: धान की फसल में बालियां निकलने के बाद दानों में दूध भरने का समय उपज की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवस्था को मिल्किंग स्टेज कहा जाता है। दिए गए कृषि स्रोत के अनुसार, इस समय फसल को संतुलित पोषक तत्व उपलब्ध कराने पर दानों के वजन और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा सकता है।
कई बार किसान इस अवस्था में मुख्य रूप से कीट और रोग नियंत्रण पर ध्यान देते हैं। हालांकि, स्रोत में दाना भराव के दौरान फसल की नियमित निगरानी और पोषण प्रबंधन को भी जरूरी बताया गया है। इसका उद्देश्य दानों के भराव, वजन और चमक को बेहतर बनाए रखना है।
मिल्किंग स्टेज पर पोषण प्रबंधन
स्रोत के अनुसार, दाना भराव के समय पोटाश आधारित घुलनशील खाद का उपयोग किया जा सकता है। इसमें 150 लीटर पानी में प्रति एकड़ लगभग 1 किलोग्राम NPK 0:50:50 के स्प्रे का उल्लेख किया गया है। स्प्रे के दौरान तेज धूप से बचने और आवश्यकता होने पर शाम के समय छिड़काव करने की बात कही गई है।
इसके साथ बोरॉन 20 प्रतिशत के उपयोग की भी जानकारी दी गई है। स्रोत में प्रति एकड़ 100 से 120 ग्राम बोरॉन का सामान्य डोज बताया गया है, जबकि अधिकतम 150 ग्राम तक उपयोग का उल्लेख किया गया है।
स्रोत में चिलेटेड माइक्रोन्यूट्रिएंट को भी इस पोषण कॉम्बिनेशन का हिस्सा बताया गया है। इसमें जिंक, बोरॉन, आयरन, कॉपर, मैंगनीज और मोलिब्डेनम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल होने की जानकारी दी गई है। इसकी मात्रा लगभग 200 से 250 ग्राम प्रति एकड़ बताई गई है।
स्प्रे करते समय इन बातों का रखें ध्यान
स्रोत के अनुसार, सभी उत्पादों को सीधे एक साथ मिलाने के बजाय पहले अलग-अलग पानी में अच्छी तरह घोलने और फिर मुख्य टंकी में डालने की सलाह दी गई है। कुल पानी की मात्रा प्रति एकड़ लगभग 150 लीटर रखने का उल्लेख है।
स्प्रे के समय मौसम का ध्यान रखने की भी बात कही गई है। स्रोत में तेज धूप के दौरान छिड़काव से बचने तथा स्प्रे के बाद कम से कम दो घंटे तक बारिश नहीं होने की स्थिति का उल्लेख किया गया है।
इस जानकारी के अनुसार, मिल्किंग स्टेज पर धान की फसल की नियमित निगरानी जरूरी है। हालांकि, किसी भी पोषक तत्व या कृषि उत्पाद की मात्रा और मिश्रण का उपयोग स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करना चाहिए।
read also: ढैंचा की खेती: कृषि विभाग की पहल से हरी खाद अपनाने वाले किसान की फसल बनी मिसाल
Leave a Comment