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यूनियन बजट 2026: क्या मध्य प्रदेश फिर रह गया खाली हाथ? जानिए उम्मीदों, हकीकत की पूरी कहानी

By bhumendra bisen

Published on: February 3, 2026

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यूनियन बजट 2026: क्या मध्य प्रदेश फिर रह गया खाली हाथ? जानिए उम्मीदों, हकीकत की पूरी कहानी

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यूनियन बजट 2026: केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए यूनियन बजट 2026 को लेकर मध्य प्रदेश में जबरदस्त चर्चा देखने को मिल रही है। राज्य सरकार को इस बजट से कई बड़ी उम्मीदें थीं, जिन्हें लेकर पहले से ही मांगों की लंबी सूची तैयार की गई थी। 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। जहां सत्तापक्ष ने इसे “विकसित भारत 2047” की दिशा में मजबूत कदम बताया, वहीं विपक्ष ने मध्य प्रदेश की अनदेखी का आरोप लगाया।

बजट से पहले मध्य प्रदेश की प्रमुख उम्मीदें

मध्य प्रदेश सरकार चाहती थी कि सिंहस्थ 2028 के लिए एक बड़ा विशेष पैकेज घोषित किया जाए। इसके साथ ही जल जीवन मिशन के तहत केंद्र पर बकाया 8120 करोड़ रुपये की राशि, आदिवासी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 564 करोड़ का आवंटन, राज्य की कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ाने जैसी मांगें प्रमुख थीं। बजट से पहले यह माना जा रहा था कि केंद्र सरकार इनमें से कई मांगों पर सकारात्मक फैसला ले सकती है।

यूनियन बजट 2026: क्या मध्य प्रदेश फिर रह गया खाली हाथ? जानिए उम्मीदों, हकीकत की पूरी कहानी

यूनियन बजट में मध्य प्रदेश को क्या मिला?

यूनियन बजट में सिंहस्थ 2028 के लिए किसी विशेष पैकेज का ऐलान नहीं किया गया, जिससे राज्य सरकार की सबसे बड़ी उम्मीद अधूरी रह गई। हालांकि, शहरी और तीर्थ स्थल विकास के लिए 5000 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा की गई है, जिसके तहत छोटे शहरों और धार्मिक स्थलों के विकास की बात कही गई है। इसके अलावा हर जिले में महिला छात्रावास निर्माण और जिला अस्पतालों के अपग्रेडेशन का ऐलान भी किया गया है, जिसे सरकार एक बड़ी उपलब्धि मान रही है।

पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क को लेकर भी बजट में रोजगार सृजन की बात की गई है। मध्य प्रदेश में पहले से स्थापित इस पार्क से वस्त्र उद्योग में रोजगार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर निराशा

किसानों के लिए बजट में नारियल, काजू और कोको उत्पादकों पर फोकस किया गया है, लेकिन मध्य प्रदेश के प्रमुख फसल उत्पादक किसान—जैसे गेहूं, चना, दलहन और सोयाबीन—को लेकर कोई विशेष घोषणा नहीं हुई। यही कारण है कि किसान वर्ग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लोग इस बजट से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

सियासी घमासान: सरकार बनाम विपक्ष

कांग्रेस का आरोप है कि बजट में की गई अधिकांश घोषणाएं सभी राज्यों के लिए सामान्य हैं और मध्य प्रदेश के लिए कोई विशेष पैकेज नहीं दिया गया। खासकर कर्ज सीमा बढ़ाने की मांग पर कोई चर्चा न होने को विपक्ष बड़ी चूक बता रहा है। वहीं, राज्य सरकार और बीजेपी नेताओं का कहना है कि तीर्थ विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, वस्त्र उद्योग और शहरी विकास से जुड़ी घोषणाएं अप्रत्यक्ष रूप से मध्य प्रदेश को बड़ा लाभ देंगी।

कुल मिलाकर मध्य प्रदेश को कितना फायदा?

यूनियन बजट 2026 में मध्य प्रदेश को कुछ अहम योजनाओं का लाभ मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन जिन बड़ी और सीधी घोषणाओं की अपेक्षा थी, वे पूरी नहीं हो सकीं। यही वजह है कि यह बजट किसी को “बंपर” तो किसी को “निराशाजनक” लग रहा है। सच यही है कि यह बजट मध्य प्रदेश के लिए उम्मीद और मायूसी—दोनों का मिला-जुला रूप लेकर आया है।

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