मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सोयाबीन भावांतर योजना एक बार फिर राहत लेकर आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को आर्थिक संबल देते हुए बड़ा फैसला लिया है। कृषि प्रधान राज्य मध्य प्रदेश में लाखों किसान अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं और ऐसे में सोयाबीन भावांतर योजना के तहत मिली यह सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है। रतलाम जिले के जावरा में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से किसानों के खातों में राशि ट्रांसफर की।
भावांतर योजना के तहत ₹810 करोड़ सीधे खातों में
राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी दी कि सोयाबीन भावांतर योजना के अंतर्गत प्रदेश के 3,77,000 सोयाबीन किसानों को कुल ₹810 करोड़ की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई है। यह भुगतान 28 दिसंबर को घोषित सोयाबीन के भावांतर मॉडल रेट ₹4271 प्रति क्विंटल के आधार पर किया गया है। इससे उन किसानों को सीधा लाभ मिला है, जिन्हें बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था।
सोयाबीन उत्पादन में अग्रणी है मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में किसान सोयाबीन की खेती करते हैं और लंबे समय से सोयाबीन भावांतर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग कर रहे थे। इससे पहले नवंबर में भी मुख्यमंत्री ने इंदौर जिले के गौतमपुरा से भावांतर योजना के तहत 1,34,000 किसानों को ₹49 करोड़ की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर की थी। उस समय तक लगभग 4,39,000 किसान 7,85,000 मीट्रिक टन सोयाबीन बेच चुके थे।
किसानों की मांग के बाद सरकार का निर्णायक कदम
सोयाबीन के उचित दाम को लेकर किसानों में लंबे समय से असंतोष था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मुद्दे को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष उठाया था। कई जिलों में किसानों ने प्रदर्शन किए। अंततः सरकार ने सोयाबीन भावांतर योजना के तहत मॉडल रेट लागू कर किसानों को राहत दी, जिससे प्रदेश के किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है।
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