भोपाल में दिलीप बिल्डकॉन फर्जी चेक मामले में बड़ा फैसला सामने आया है, जहां कंपनी के नाम पर 10 करोड़ रुपये निकालने की कोशिश करने वाले आरोपी को अदालत ने दोषी करार देते हुए सख्त सजा सुनाई है। इस घटना ने बैंकिंग सुरक्षा और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला एवं सत्र न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह की आर्थिक धोखाधड़ी को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलेगी।
दिलीप बिल्डकॉन फर्जी चेक मामले में कोर्ट का फैसला
जिला कोर्ट के 23वें अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने सुनवाई के बाद आरोपी शौकींद्र कुमार पिता धर्मपाल को दोषी ठहराया। अदालत ने उसे विभिन्न धाराओं के तहत तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक धारा में 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एसटीएफ आकिल खान ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी के खिलाफ साक्ष्यों को पर्याप्त माना।
शिकायत के बाद सामने आया बड़ा बैंक धोखाधड़ी प्रयास
अभियोजन के अनुसार, दिलीप बिल्डकॉन कंपनी के अध्यक्ष भारत की ओर से एसटीएफ को लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी द्वारा पहले जारी किया गया 3,000 रुपये का चेक, जिसका क्रमांक 492400 था, किसी अज्ञात व्यक्ति ने क्लोन कर लिया। इसी नंबर का उपयोग करते हुए आरोपी ने 10 करोड़ रुपये का फर्जी चेक तैयार किया और उसे देव कंस्ट्रक्शन के नाम से 27 फरवरी 2020 को केनरा बैंक, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया।
बैंक की सतर्कता से बच गई करोड़ों की ठगी
बैंक की क्लियरिंग शाखा ने जांच के दौरान पाया कि संबंधित चेक नंबर पहले ही उपयोग हो चुका था, जिससे संदेह पैदा हुआ। बैंक अधिकारियों ने तुरंत भुगतान रोक दिया और संबंधित शाखा व पुलिस को सूचना दी। इसके बाद एसटीएफ ने धारा 420, 511 और 474 भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश किया गया, जहां प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उसे दोषी करार दिया गया।
अदालत के इस फैसले को आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक मजबूत संदेश माना जा रहा है। इससे स्पष्ट हुआ है कि बैंकिंग धोखाधड़ी और कॉर्पोरेट फर्जीवाड़े में शामिल लोगों को कानून के तहत सख्त सजा दी जाएगी।
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