इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का असली आंकड़ा अब भी सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। सरकारी दावों और स्थानीय बयानों के बीच गहरी खाई दिख रही है। प्रशासन की ओर से पहले चार से पांच मौतों की बात सामने आई, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 16 तक पहुंच चुकी है। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
पार्षद और विधायक के बयान बढ़ा रहे संदेह
भगीरथपुरा के पार्षद कमल वाघेला ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में 15 मौतों को स्वीकार किया था। यही नहीं, इसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने भी एक निजी अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि स्थानीय पार्षद से मिली जानकारी के अनुसार 15 लोगों की मौत हुई है। जब जनप्रतिनिधि खुद इस आंकड़े को स्वीकार कर रहे हैं, तो फिर आधिकारिक आंकड़े कम क्यों बताए जा रहे हैं, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।
मुआवजा केवल सात मृतकों को, सवाल यहीं से गहराया
सरकार द्वारा जारी पत्र के अनुसार अब तक सात मृतकों को ही मुआवजा राशि दी गई है। इन सात लोगों की मृत्यु 31 जनवरी 2025 को होना दर्शाई गई है और इंदौर प्रशासन द्वारा प्रति परिवार ₹लाख की मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है। यही बिंदु पूरे मामले को और उलझा देता है, क्योंकि जब मुआवजा सात को मिला है तो आधिकारिक तौर पर मौतों की संख्या सात क्यों नहीं घोषित की जा रही।
बीमारों की संख्या और भयावह स्थिति
भगीरथपुरा में दूषित पानी से प्रभावित लोगों की संख्या 1500 से अधिक बताई जा रही है। लगभग 150 से 200 लोग बीमार हैं, जिनमें से 30 से 35 मरीज आईसीयू में गंभीर हालत में भर्ती हैं। जिस स्थान पर सबसे पहले नर्मदा जल लाइन की लीकेज स्पॉट हुई थी, वही टंकी आज इस पूरे हादसे का प्रतीक बन चुकी है।
जांच, कार्रवाई और फिर वही सवाल
प्रशासन द्वारा जल नमूनों की जांच कराई जा रही है। एम्स और कोलकाता से आई बैक्टीरियोलॉजी टीम सैंपल लेकर कारणों की पड़ताल में जुटी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नगर निगम और पीएचई विभाग के अधिकारियों पर निलंबन जैसी कार्रवाई भी की है। विपक्ष मुद्दा उठा रहा है, जांच जारी है, लेकिन भगीरथपुरा दूषित पानी मौतें का असली आंकड़ा अब भी धुंध में है। पूरे इलाके में हर घर मातम में डूबा है और जवाब का इंतजार अब भी जारी है।
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