Balaghat News: शासन द्वारा राइस मिलिंग के लिए लागू किए गए नए अनुबंध के खिलाफ बालाघाट जिले सहित पूरे मध्य प्रदेश में राइस मिलर्स विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को बालाघाट जिले के सभी राइस मिलर्स एकजुट होकर कलेक्टरेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए नए अनुबंध के तहत मिलिंग कार्य करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। मिलर्स का कहना है कि जब तक उनकी लंबित बकाया राशि का भुगतान नहीं होता, तब तक किसी भी स्थिति में मिलिंग कार्य शुरू नहीं किया जाएगा।
29 दिसंबर के बाद फिर कलेक्टरेट पहुंचे मिलर्स
यह पहला मौका नहीं है जब राइस मिलर्स विरोध सामने आया हो। इससे पहले 29 दिसंबर को भी राइस मिल एसोसिएशन बालाघाट के बैनर तले मिलर्स अपनी-अपनी मिलों की चाबियां लेकर कलेक्टरेट पहुंचे थे। उस समय भी शासन और मिलर्स के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी थी, जिससे नाराजगी और गहराती चली गई।
दो वर्षों से बकाया भुगतान ने बिगाड़ी आर्थिक हालत
राइस मिलर्स का आरोप है कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 की मिलिंग, ट्रांसपोर्टिंग, फोर्टिफाइड कर्नल राइस और बारदाने की राशि अब तक नहीं दी गई है। लगातार बढ़ते खर्च, मजदूरी दर और बिजली बिल के बीच भुगतान न मिलने से कई छोटी मिलें बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इसी कारण राइस मिलर्स विरोध अब केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में फैल चुका है।
प्रशासनिक दबाव से और भड़का आक्रोश
राइस मिल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष आनंद कुमार ठाकरे ने बताया कि धान उपार्जन जोरों पर है, लेकिन प्रशासन द्वारा अनुबंध न करने पर मिलों को सील करने और ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी जा रही है। इस दबावपूर्ण कार्रवाई से राइस मिलर्स विरोध और अधिक उग्र हो गया है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदेशव्यापी असर तय
मिलर्स ने साफ कहा है कि जब तक सभी लंबित भुगतान नहीं किए जाते और नए अनुबंध की शर्तों में बदलाव नहीं होता, तब तक बालाघाट सहित पूरे मध्य प्रदेश में राइस मिलिंग कार्य शुरू नहीं किया जाएगा। इससे आने वाले समय में सरकारी धान उठाव और चावल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
read also: कृषि महाविद्यालय बालाघाट में मशरूम यूनिट उद्घाटन, आत्मनिर्भर कृषि शिक्षा की ओर बड़ा कदम
Leave a Comment