Balaghat khabar: बालाघाट में गुरुवार को स्थानीय तहसील न्यायालय उस समय गहमागहमी का केंद्र बन गया, जब एक ही परिवार के सदस्य न्यायालय के आदेश के अनुरूप भूमि के समान बंटवारे की मांग को लेकर एकजुट होकर खड़े हो गए। मामला पारिवारिक जमीन से जुड़ा है, जिसमें एक पक्ष ने आरोप लगाया कि वर्षों पहले धोखाधड़ी के जरिए पूरी संपत्ति एक व्यक्ति के नाम दर्ज कर ली गई। अब, निचली अदालत से लेकर सत्र न्यायालय तक से राहत मिलने के बावजूद, जमीनी स्तर पर आदेश के पालन को लेकर विवाद बना हुआ है।
भूमि बंटवारा विवाद में कोर्ट के आदेश और जमीनी हकीकत
वार्ड क्रमांक 33 निवासी सौरभ सोनेकर के अनुसार, उनके पिता छह भाई और एक बहन थे। आरोप है कि वर्ष 2010 में मनोहर सोनेकर ने धोखाधड़ी कर संपत्ति अपने नाम दर्ज करवा ली। इसके बाद परिवार ने सिविल सूट दायर किया, जिसमें निचली अदालत और सत्र न्यायालय—दोनों से परिवार के पक्ष में फैसला आया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी छह भाइयों और एक बहन को 1/7-1/7 हिस्सा मिलना चाहिए।
नजरी नक्शा और फर्द पर आपत्ति
कोर्ट के आदेश के बाद प्रकरण तहसील न्यायालय पहुंचा, लेकिन आरोप है कि अब भी पुराने खसरे मनोहर सोनेकर के नाम से निकल रहे हैं और सड़क से लगी भूमि एक ही व्यक्ति को दी जा रही है। परिवार का कहना है कि बंटवारा समान होना चाहिए, ताकि सभी को सड़क की ओर दुकान और पीछे प्लॉट मिल सके। इसी मांग के साथ परिवार ने फर्द को गलत बताते हुए नजरी नक्शा तैयार कराने की अपील की है। उनका आग्रह है कि पटवारी के माध्यम से मौके पर नाप-जोख कर सहमति से नक्शा बनाया जाए, ताकि सभी को कब्जा मिल सके और भूमि बंटवारा विवाद का स्थायी समाधान हो।
read also: टीबी मुक्त अभियान को नई ऊर्जा, दिल्ली में सांसदों का एकजुट संकल्प
Leave a Comment