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Balaghat Naxal Surrender News: बालाघाट में नक्सलवाद का अंत? दो कुख्यात नक्सलियों ने किया फिर आत्मसमर्पण

By bhumendra bisen

Published on: December 11, 2025

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Balaghat Naxal Surrender News: बालाघाट में नक्सलवाद का अंत? दो कुख्यात नक्सलियों ने किया फिर आत्मसमर्पण

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Balaghat Naxal Surrender News: बालाघाट जिले से एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है, जहां दो कुख्यात नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता दिलाई है। इस बार दीपक, जो बालाघाट जिले के बालागोदी का रहने वाला है, और उसके साथी रोहित ने कोरका स्थित सीआरपीएफ कैंप में एक गांव के निवासी की मदद से आत्मसमर्पण किया।

यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने की समय सीमा निर्धारित की है। इस डेडलाइन से पहले ही नक्सलियों में सरेंडर करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है, और अब सिर्फ चार माह शेष रहते हुए हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं। एमएमसी जोन में अब तक करीब 36 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे सुरक्षा बलों की रणनीति सफल होती दिख रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पुलिस अधिकारियों ने भी दावा किया है कि घाट अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है।

43 लाख के इनामी नक्सली ने डाली हथियार

जिले में यह तीसरी बार है जब नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। बिरसा थाना क्षेत्र के अंतर्गत मछुदा पंचायत के कोरका में हुए इस सरेंडर में दीपक पर 29 लाख का और रोहित पर 14 लाख का इनाम घोषित था, जो कुल 43 लाख होता है। अधिकारियों के अनुसार दीपक मूल रूप से मोहनपुर पंचायत के गांव पालागोदी का रहने वाला है और वर्ष 1995 के आसपास नक्सल संगठन से जुड़कर मलाजगढ़ दलम में सक्रिय रहा। वह एमएमसी जोन में डीबीसीएम यानी डिवीजनल कमेटी मेंबर के रूप में कार्यरत था। उस पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में इनाम घोषित था। सरेंडर के दौरान दीपक ने एक स्टैंड गन भी जमा कराई है।

बालाघाट में नक्सलवाद का अध्याय अब समाप्त?

बालाघाट जिले के तीन युवक नक्सल संगठन में शामिल हुए थे संपद ने महाराष्ट्र में, संगीता ने छत्तीसगढ़ में और अब दीपक ने अपने साथी रोहित के साथ बालाघाट में आत्मसमर्पण कर दिया है। संगीता और संपद दोनों रासीमेठा गांव के निवासी हैं, जबकि दीपक पालागोदी का रहने वाला है। लगातार हो रहे आत्मसमर्पणों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि 90 के दशक से मध्य प्रदेश में सक्रिय नक्सल गतिविधियां अब समाप्ति की ओर बढ़ चुकी हैं। सुरक्षा बलों और सरकार की संयुक्त रणनीति के चलते बालाघाट, जिसे कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता था, अब सुरक्षित भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है।

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