ग्राम जराही में आयोजित जीवामृत सजीव प्रदर्शन ने किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया। राणा हनुमान सिंह कृषि विज्ञान केंद्र बड़गांव के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस. आर. धुवारे के नेतृत्व में 28 फरवरी को यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषक श्री विद्यालाल टेंभरे के अलसी खेत में विद्यार्थियों की टीम ने जीवामृत सजीव प्रदर्शन कर किसानों को इसके प्रत्यक्ष लाभ समझाए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
प्राकृतिक खेती के लाभों पर विस्तार से चर्चा
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति घट रही है और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने किसानों को छोटे स्तर से प्राकृतिक खेती शुरू करने और गौ-आधारित कृषि पद्धति अपनाने की सलाह दी।
वैज्ञानिकों ने दी तकनीकी जानकारी
डॉ. धुवारे ने जीवामृत सजीव प्रदर्शन के माध्यम से जीवामृत, दशपर्णी अर्क, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, मल्चिंग और फसल प्रबंधन की तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने उत्साहपूर्वक प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया। जीवामृत सजीव प्रदर्शन क्षेत्र में सतत और लाभकारी कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है।
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