चना किसानों के लिए अच्छी पैदावार पाने में सही किस्म का चुनाव और फसल प्रबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि संबंधी एक वीडियो में देसी चने की पांच किस्मों के बारे में बताया गया है, जिनसे अनुकूल परिस्थितियों और उचित देखभाल में 9 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि, वास्तविक पैदावार मिट्टी, मौसम, सिंचाई और खेती के प्रबंधन पर निर्भर करती है।
Chana Ki Top 5 Varieties और बुवाई का सही समय
चने की बुवाई के लिए 15 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच का समय उपयुक्त माना गया है। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार बुवाई का समय तय करना चाहिए।
बुवाई के समय कतारों के बीच लगभग 12 इंच की दूरी रखने का सुझाव दिया गया है। जहां उकठा रोग की समस्या अधिक रहती है, वहां खेत और किस्म के अनुसार बुवाई की गहराई तथा अन्य उपायों पर कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
प्रति एकड़ खाद प्रबंधन के लिए 30 किलो डीएपी, 10 किलो बेंटोनाइट सल्फर, 20 किलो पोटाश, 10 किलो समुद्री शैवाल आधारित उत्पाद और 3 किलो दानेदार कीटनाशक का उल्लेख किया गया है। इन सभी उत्पादों का इस्तेमाल मिट्टी की जांच, उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही करें।
1. JG 52 चना किस्म
JG 52 को जवाहर चना किस्म बताया गया है, जिसका विकास जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से संबंधित है। वीडियो के अनुसार, यह किस्म मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकती है।
इसकी फसल लगभग 110 दिनों में पकती है और पौधों की ऊंचाई करीब 45 से 50 सेंटीमीटर रहती है। इसमें फूल लगभग 58 दिनों के आसपास आने की जानकारी दी गई है। वीडियो में इसे सूखी जड़ सड़न के प्रति सहनशील बताया गया है, हालांकि रोग नियंत्रण के लिए उचित प्रबंधन जरूरी है।
अनुकूल परिस्थितियों में इस किस्म से 9 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलने का अनुमान बताया गया है।
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2. RVG 202 चना किस्म
RVG 202 को मध्य भारत के लिए उपयोगी देसी चने की किस्म बताया गया है। इसे राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया था। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी खेती की जा सकती है।
इस किस्म को पकने में लगभग 102 से 105 दिन लगते हैं। पौधे करीब 60 सेंटीमीटर ऊंचे हो सकते हैं और दाने सामान्यतः गहरे भूरे रंग के बताए गए हैं।
इसकी संभावित पैदावार 10 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है। अच्छी पैदावार के लिए समय पर बुवाई, उचित बीज दर और संतुलित पोषण प्रबंधन जरूरी है।
3. फुले विक्रम चना किस्म
फुले विक्रम महाराष्ट्र की किस्म है, जिसे महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ से संबंधित बताया गया है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में इसकी खेती की जा सकती है।
इस किस्म के पौधों की ऊंचाई लगभग 55 से 60 सेंटीमीटर रहती है। इसके फूल गुलाबी और दाने भूरे रंग के बताए गए हैं। फसल लगभग 105 से 110 दिनों में पक सकती है।
इससे 9 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिलने का अनुमान है। इसकी फलियां जमीन से कुछ ऊंचाई पर बनती हैं, जिससे उपयुक्त परिस्थितियों में मशीन से कटाई करना आसान हो सकता है।
4. पूसा मानव चना किस्म
पूसा मानव को BGM 20211 नाम से भी जाना जाता है। यह किस्म वर्ष 2021 में जारी की गई थी और मध्य भारत के लिए विकसित की गई है।
इसकी प्रमुख विशेषताओं में अपेक्षाकृत जल्दी पकना और उकठा रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता शामिल बताई गई है। पौधों की ऊंचाई लगभग 52 से 55 सेंटीमीटर और पकने की अवधि करीब 105 दिन बताई गई है।
उचित देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में इससे 10 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिलने की संभावना बताई गई है। सिंचाई की जरूरत मिट्टी और मौसम के अनुसार तय करनी चाहिए।
5. जाकी 921 चना किस्म
जाकी 921 को महाराष्ट्र की देसी चने की किस्म बताया गया है। इसके दाने हल्के भूरे या पीलेपन लिए हुए हो सकते हैं। पौधों की ऊंचाई लगभग 50 से 60 सेंटीमीटर और फसल की अवधि करीब 100 से 110 दिन बताई गई है।
इससे 9 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल सकता है। किसान अपने क्षेत्र की जलवायु, उपलब्ध सिंचाई और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर इस किस्म का चुनाव कर सकते हैं।
चने की पैदावार बढ़ाने के लिए सही प्रबंधन जरूरी
सिर्फ अच्छी किस्म के बीज चुनने से अधिक पैदावार सुनिश्चित नहीं होती। समय पर बुवाई, प्रमाणित बीज, उचित बीज दर, संतुलित खाद, खरपतवार नियंत्रण और रोगों की नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण हैं।
बीज उपचार के लिए चने में अनुशंसित फफूंदनाशक का ही इस्तेमाल करें। खाद और कीटनाशक की मात्रा मिट्टी की स्थिति, उत्पाद के निर्देशों तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करें। किसान अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करके उपयुक्त किस्म और बुवाई संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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