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धान की फसल पर 3 खतरनाक कीटों का हमला, समय रहते पहचानना जरूरी

By Sonu bisen

Published on: September 22, 2026

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धान की फसल पर 3 खतरनाक कीटों का हमला, समय रहते पहचानना जरूरी

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Kheti News: धान की फसल में घबोट अवस्था से लेकर बालियों में दूध भरने तक का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान कुछ प्रमुख कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनमें भूरा माहू, माइट और गंधी बग प्रमुख हैं। समय पर इनकी पहचान नहीं होने पर पौधों और दानों पर इसका असर दिखाई दे सकता है।

भूरा माहू और माइट से धान को खतरा

भूरा माहू यानी ब्राउन प्लांट हॉपर आमतौर पर धान के पौधे के निचले हिस्से में तने के पास दिखाई देता है। यह पौधे का रस चूसकर उसे कमजोर करता है। ज्यादा प्रकोप होने पर पौधे पीले पड़कर सूखने लगते हैं और खेत में जले हुए हिस्से जैसे निशान दिखाई दे सकते हैं, जिसे हॉपर बर्न कहा जाता है। फसल में अत्यधिक यूरिया का प्रयोग और लगातार पानी भरा रहना इसके बढ़ने के अनुकूल परिस्थितियां मानी गई हैं।

स्रोत में भूरा माहू के अलग-अलग स्तर के प्रकोप के लिए बोप्रोफेजिन 25% एससी, पाइमेट्रोजिन 50% डब्ल्यूजी और ट्राइफ्लुमेजोपाइरिम 10% एससी जैसे तकनीकी विकल्पों का उल्लेख किया गया है। इनके उपयोग से पहले उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि विभाग की अनुशंसाओं के अनुसार मात्रा और प्रयोग विधि की पुष्टि करना जरूरी है।

माइट बेहद सूक्ष्म कीट होता है, इसलिए इसकी पहचान आसानी से नहीं हो पाती। गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम में इसकी समस्या बढ़ने की बात स्रोत में बताई गई है। इसके प्रकोप से पत्तियां लाल, भूरी या जंग जैसे रंग की दिखाई दे सकती हैं और दानों पर भी असर पड़ सकता है।

माइट की पहचान के लिए सफेद कागज पर पत्ती या बाली को थपथपाने का तरीका बताया गया है। इसके अलावा काली मोबाइल स्क्रीन पर कीट देखने और सफेद कागज में पत्ती को हल्के हाथ से रगड़कर निशान देखने के तरीके भी बताए गए हैं। नियंत्रण के लिए स्रोत में प्रोपरजाइट, स्पाइरोमेसिफेन और एबामेक्टिन जैसे एक्रीसाइड विकल्पों का उल्लेख किया गया है।

बालियों में दूध भरने पर गंधी बग की निगरानी जरूरी

धान में गंधी बग का प्रकोप उस समय बढ़ सकता है, जब बालियां निकल आती हैं और दानों में दूध भरना शुरू होता है। यह कीट दानों से रस चूसता है, जिससे प्रभावित दाने खाली या कमजोर रह सकते हैं। ऐसे दानों पर काले निशान भी दिखाई देने की बात स्रोत में कही गई है।

गंधी बग की पहचान उसकी विशिष्ट बदबू से भी की जा सकती है। प्रकोप अधिक होने पर कई दाने प्रभावित हो सकते हैं और उपज पर असर पड़ सकता है। स्रोत में इसके नियंत्रण के लिए मेलाथियान 5% पाउडर और लैम्डा-सायहेलोथ्रिन 5% ईसी जैसे विकल्पों का उल्लेख किया गया है। कुछ संयोजन वाली दवाओं का भी जिक्र किया गया है।

स्प्रे के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

स्रोत के अनुसार कीटनाशकों का प्रयोग करते समय पर्याप्त पानी, सही छिड़काव और पत्तियों व बालियों तक दवा की पहुंच पर ध्यान देना चाहिए। माइट के नियंत्रण के संदर्भ में 150 से 200 लीटर पानी प्रति एकड़ के उपयोग और सिलिकॉन आधारित स्टिकर मिलाने का उल्लेख किया गया है। गंधी बग के मामले में बालियों पर समान रूप से स्प्रे पहुंचाने की बात कही गई है।

धान के कीटों की पहचान और नियंत्रण में खेत की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है। किसी भी कृषि रसायन का प्रयोग करने से पहले उसके लेबल, निर्धारित मात्रा और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही उपयोग करना चाहिए।

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Sonu bisen

मेरा नाम सोनू बिसेन है। मैं एक लेखक हु और TazaSanket.com पर लेखन का काम करता हूं। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मैं मध्य प्रदेश, विशेष रूप से बालाघाट ज़िले की ताज़ा एवं क्रिकेट न्यूज़ और विश्वसनीय लोकल खबरें पाठकों तक पहुँचाने का कार्य करता हूं

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