खरीफ 2026 को लेकर कृषि विभाग ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष जिले के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इसके चलते किसानों को कम पानी वाली फसलों और आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि उत्पादन पर ज्यादा असर न पड़े।
कृषि विभाग का कहना है कि लंबे ड्राई स्पेल की स्थिति बन सकती है। इसलिए किसानों को पहले से तैयारी करने की जरूरत है। विभाग ने वैज्ञानिक तरीके से फसल चयन और समय पर बुवाई पर जोर दिया है।
कई क्षेत्रों में कम वर्षा का अनुमान
पूर्वानुमान के मुताबिक बैहर-गढ़ी क्षेत्र में 65 से 75 प्रतिशत तक कम वर्षा हो सकती है। वहीं बिरसा क्षेत्र में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि लांजी, किरनापुर, कटंगी और तिरोड़ी क्षेत्रों में कुछ जगह सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है।
इसके अलावा जिले के करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्से में कम बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है।
कम अवधि वाली फसलें होंगी बेहतर विकल्प
खरीफ 2026 में कृषि विशेषज्ञों ने अरहर, मूंग, उड़द, तिल, रामतिल, मक्का, रागी, कोदो और कुटकी जैसी फसलों को बेहतर विकल्प बताया है। साथ ही कम अवधि वाली धान और सोयाबीन की किस्में अपनाने की सलाह दी गई है।
विभाग ने किसानों को लाइन से बुवाई, छिड़काव पद्धति और डायरेक्ट सीडेड राइस तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया है। इससे कम पानी में भी अच्छी खेती संभव हो सकेगी।
किसानों के लिए उपलब्ध कराए गए बीज
कृषि विभाग ने जिले के सभी विकासखंड कार्यालयों में प्रमाणित बीज उपलब्ध करा दिए हैं। इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र और शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में भी धान और अन्य फसलों के बीज दिए जा रहे हैं।
कम अवधि वाली धान की उन्नत किस्मों में एमटीयू-1010, जेआरएच-19, जेआर-81 और जेआर-216 शामिल हैं। इनकी अवधि लगभग 100 से 125 दिन बताई गई है।
निष्कर्ष
खरीफ 2026 को देखते हुए किसानों के लिए समय रहते सही फसल और तकनीक चुनना बेहद जरूरी माना जा रहा है। कृषि विभाग की सलाह मानकर किसान कम बारिश की स्थिति में भी अपनी उपज और आय सुरक्षित रख सकते हैं।
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