बालाघाट न्यूज़ मध्य प्रदेश क्रिकेट कृषि भारत शिक्षा सरकारी योजना खेल धर्म

आईएफसी लखपति दीदी योजना से बदली रोशनी लिल्हारे की जिंदगी, अब बनीं गांव की प्रेरणादायक महिला

By bhumendra bisen

Published on: May 6, 2026

Follow Us

आईएफसी लखपति दीदी योजना से बदली रोशनी लिल्हारे की जिंदगी, अब बनीं गांव की प्रेरणादायक महिला

---Advertisement---

मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित आईएफसी लखपति दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। बालाघाट जिले के ग्राम नैतरा की रहने वाली रोशनी लिल्हारे इसकी शानदार मिसाल बनकर सामने आई हैं। सीमित आय और आर्थिक परेशानियों से जूझने वाली रोशनी आज आत्मनिर्भर महिला के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

रोशनी लिल्हारे ने एकीकृत कृषि क्लस्टर (IFC) से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गईं। आज वे “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं और कई महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।

आईएफसी लखपति दीदी योजना से मिली नई दिशा

रोशनी लिल्हारे का परिवार पहले कृषि और छोटे-मोटे कार्यों पर निर्भर था। उनकी व्यक्तिगत मासिक आय लगभग 5 हजार रुपये थी, जबकि पूरे परिवार की कुल आय करीब 12 हजार रुपये प्रतिमाह थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।

12 दिसंबर 2017 को वे “कामना महिला आजीविका स्व-सहायता समूह” से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण और स्वरोजगार की जानकारी मिली। धीरे-धीरे उनकी सक्रियता बढ़ी और उन्हें उत्पादक समूह में अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

जैविक खेती और पशुपालन से बढ़ी आय

आईएफसी लखपति दीदी योजना के तहत रोशनी लिल्हारे को सीआईएफ के माध्यम से 50 हजार रुपये और सीसीएल के तहत 2 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली। इस राशि का उपयोग उन्होंने सब्जी उत्पादन, पशुपालन और मुर्गीपालन शुरू करने में किया।

उन्होंने रसायन मुक्त जैविक खेती को अपनाया, जिससे उनकी फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में अच्छी कीमत मिलने लगी। इसके साथ ही गांव के अन्य किसानों को भी जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

रोशनी लिल्हारे ने बताया कि IFC परियोजना के अंतर्गत उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी भी दी गई। इससे उन्हें खेती और व्यवसाय को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिली।

आज हर महीने हो रही हजारों की कमाई

पहले जहां परिवार की आय सीमित थी, वहीं अब रोशनी लिल्हारे की मासिक आय में बड़ा बदलाव आया है। सब्जी उत्पादन से उन्हें लगभग 7 हजार रुपये, पशुपालन से 12 हजार रुपये और मुर्गीपालन से करीब 4 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है।

इस तरह उनकी कुल मासिक आय 23 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि परिवार की कुल आय अब लगभग 30 हजार रुपये प्रतिमाह हो चुकी है। आर्थिक मजबूती के साथ उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

आज रोशनी लिल्हारे गांव में एक सशक्त महिला के रूप में पहचानी जाती हैं। वे अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं और समाज में नई पहचान बना सकती हैं।

महिला सशक्तिकरण की मजबूत पहल

मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चलाई जा रही आईएफसी लखपति दीदी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दे रही है। इस योजना से महिलाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे वे अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं गांवों में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने में अहम साबित हो रही हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर आईएफसी लखपति दीदी योजना ने रोशनी लिल्हारे के जीवन को नई पहचान दी है। उनकी सफलता कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है और यह दिखाती है कि मेहनत, प्रशिक्षण और सही सहयोग से आत्मनिर्भर बनना संभव है।

Leave a Comment