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BGT Khabar: यूजीसी बिल 2026 के खिलाफ उबाल, बालाघाट में सवर्ण समाज की विशाल बाइक रैली

By bhumendra bisen

Published on: February 3, 2026

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BGT Khabar: यूजीसी बिल 2026 के खिलाफ उबाल, बालाघाट में सवर्ण समाज की विशाल बाइक रैली

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BGT Khabar:  यूजीसी बिल 2026 को लेकर देशभर में उठ रही असहमति के बीच मध्य प्रदेश के बालाघाट में 2 फरवरी को सकल सामान्य समाज ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालयों में लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ समाज ने नगर में विशाल बाइक रैली निकाली, जो कलेक्टरेट कार्यालय पहुंची। यहां समाज की ओर से भारत के महामहिम राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर बालाघाट को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 13 जनवरी 2026 से लागू किए गए नए नियम सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण हैं और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

काला कानून बताकर तत्काल वापसी की मांग

सकल सामान्य समाज का आरोप है कि University Grants Commission द्वारा लागू किए गए इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य को अंधकारमय बना देंगे। ज्ञापन में कहा गया है कि नए अध्यादेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सख्त सुरक्षा प्रावधान हैं, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। इससे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को परोक्ष रूप से अपराधी की श्रेणी में खड़ा किया जा रहा है।

नियम 3(सी) पर सबसे ज्यादा आपत्ति

ज्ञापन में विशेष रूप से नियम 3(सी) पर कड़ा विरोध जताया गया है। समाज का कहना है कि यह प्रावधान अत्यंत अस्पष्ट, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है। जातिगत भेदभाव की कोई स्पष्ट परिभाषा न होने से इसके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है, जिससे शैक्षणिक संस्थानों में आपसी संघर्ष और सामाजिक वैमनस्य फैल सकता है। इसके अलावा कॉलेज प्रमुख की अध्यक्षता में गठित होने वाली समानता समिति में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व की उपेक्षा का आरोप भी लगाया गया है।

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BGT Khabar यूजीसी बिल 2026 के खिलाफ उबाल, बालाघाट में सवर्ण समाज की विशाल बाइक रैली

आरक्षण और समानता को लेकर क्या हैं मांगें?

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति और क्रीमी लेयर होना चाहिए। उनका कहना है कि वर्तमान प्रावधान सामाजिक समानता के बजाय वर्गों के बीच खाई को और गहरा कर रहे हैं। समाज ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आगे धरना, प्रदर्शन, बालाघाट बंद और भारत बंद जैसे बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट की रोक और आगे की चेतावनी

सामाजिक प्रतिनिधियों ने बताया कि इस कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जहां फिलहाल स्थगन आदेश मिला है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि यदि सरकार ने कानून में संशोधन नहीं किया या इसे वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। सकल सामान्य समाज का कहना है कि सरकार के पास इस अध्यादेश को वापस लेने या संशोधित करने का पूरा अधिकार है और उसे बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों के छात्रों को समान सुरक्षा देनी चाहिए।

निष्कर्ष:

बालाघाट में हुआ यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि यूजीसी बिल 2026 को लेकर असंतोष थमने वाला नहीं है। सवर्ण समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और अपने भविष्य को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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