Kisan News: आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से देश के किसानों को बड़ी राहत की उम्मीद है। बढ़ती महंगाई, खेती की लागत और अनिश्चित मौसम के बीच किसान चाहते हैं कि सरकार इस बार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ठोस और दूरगामी कदम उठाए। किसानों की प्रमुख मांगों में खाद और बीज की आसान उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को कानूनी दर्जा देना और किसान बजट 2026 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि बढ़ाना शामिल है।
पीएम किसान सम्मान निधि पर बढ़ी निगाहें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण में बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक करीब 11 करोड़ किसानों को लाखों करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। सरकार का कहना है कि उसका फोकस किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर है, लेकिन किसान संगठनों का मानना है कि सालाना ₹6000 की मौजूदा सहायता आज की महंगाई और खेती के बढ़ते खर्चों के मुकाबले काफी कम है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली और मशीनरी की लागत तेजी से बढ़ने से छोटे और सीमांत किसानों पर दबाव बढ़ा है, इसलिए किसान बजट 2026 में इस राशि को बढ़ाने की मांग तेज हो गई है।

GST में राहत की मांग
किसानों की एक बड़ी उम्मीद यह भी है कि खेती से जुड़े जरूरी सामान पर लगने वाला GST कम किया जाए। बीज, यूरिया, खाद, कृषि यंत्र, ट्रैक्टर और डीजल लगातार महंगे होते जा रहे हैं। खासतौर पर कीटनाशकों पर लगने वाले 18 प्रतिशत GST को घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की जा रही है, ताकि किसानों का कुल खर्च कम हो सके और खेती फिर से फायदे का सौदा बन पाए।
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पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं पर निवेश की जरूरत
किसान चाहते हैं कि बजट 2026 में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और परिवहन जैसी पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं पर ज्यादा निवेश किया जाए। इससे फसल खराब होने से बचेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे। साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ छोटे किसानों, बारिश पर निर्भर इलाकों और महिला किसानों तक सीधे पहुंचे।
मजबूत खेती से ही मजबूत भारत
किसानों का मानना है कि अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनाना है, तो उसकी नींव मजबूत खेती पर ही टिकी होगी। किसान बजट 2026 अगर किसानों की जरूरतों को समझकर तैयार किया गया, तो यह भारतीय कृषि को नई दिशा दे सकता है और देश की विकास यात्रा को मजबूती देगा।
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