बालाघाट जिला प्रशासन और पुलिस विभाग नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में एक ऐतिहासिक पहल के तहत पुलिस विभाग के एकल सुविधा केंद्र और जिला प्रशासन के माध्यम से जिले के 120 युवक-युवतियों को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में रोजगार के लिए रवाना किया गया। यह पहल न केवल रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बनी, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास और उनके परिवारों की उम्मीदों को भी नई दिशा देने वाली साबित हुई।
पुलिस लाइन से रोजगार की ओर पहला कदम
दिनांक 17 जनवरी को बालाघाट पुलिस लाइन परिसर से चयनित युवाओं को बसों के माध्यम से रवाना किया गया। इस अवसर पर सांसद भारती पारधी, नगर पालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर, एसडीएम गोपाल सोनी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदर्शकांत शुक्ला, साईं वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी के संचालक आशीष मिश्रा सहित जिला एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से बसों को हरी झंडी दिखाकर युवाओं को शुभकामनाओं के साथ विदा किया।
रोजगार से पहले मिली पूरी जानकारी
युवाओं को रवाना करने से पहले उन्हें जॉब प्रोफाइल, वेतन, भोजन, आवास, अवकाश और अन्य सुविधाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि वे मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार होकर नए कार्यस्थल पर पहुंचें। कार्यक्रम के दौरान कुछ माह पूर्व अहमदाबाद और बेंगलुरु में कार्यरत बालाघाट के युवाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद भी कराया गया, जिससे नए चयनित युवाओं का आत्मविश्वास और अधिक बढ़ा।
सांसद भारती पारधी का प्रेरणादायक संदेश
सांसद भारती पारधी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए घर से बाहर निकलकर अवसरों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन ने देश की अग्रणी कंपनियों से समन्वय कर इंटरव्यू की व्यवस्था की, जिसके माध्यम से युवाओं का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन पूरी जिम्मेदारी के साथ युवाओं को रोजगार के लिए भेज रहा है और पूर्व में फैलाए गए भ्रमपूर्ण वीडियो पूरी तरह निराधार थे।
रोजगार से बदली जिंदगी, परिवारों को मिला संबल
उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में भेजे गए युवा आज खुश और सुरक्षित हैं, अपने परिवारों से निरंतर संपर्क में हैं और अपनी कमाई से परिवार को आर्थिक सहयोग भी दे रहे हैं। यह पहल साबित कर रही है कि रोजगार मेलों और प्रशासनिक सहयोग से ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं का भविष्य संवारा जा सकता है।
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