BGT Khabar: पिछले दिनों बालाघाट जिले में आयोजित रोजगार मेले के बाद सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया। कुछ युवाओं ने वीडियो साझा कर रोजगार प्रक्रिया को धोखाधड़ी बताया, जिससे बालाघाट रोजगार मेला सच्चाई को लेकर सवाल खड़े हो गए। हालांकि, इन्हीं कंपनियों में कार्यरत युवतियों ने सामने आकर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है।
रोजगार मेले के माध्यम से युवाओं को मिला अवसर
जिला प्रशासन और समाजसेवी संगठनों की पहल पर बालाघाट रोजगार मेला सच्चाई यह है कि हजारों बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर दिए गए। चयनित युवाओं को बेंगलुरु और होसूर स्थित TVS एवं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में काम करने का मौका मिला, जहां उन्हें पहले से पूरी जानकारी दी गई थी।
बालाघाट रोजगार मेला सच्चाई
कलेक्टर बालाघाट के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से वायरल वीडियो में युवतियों ने बताया कि किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं की गई। रोजगार की आवश्यकता के चलते उन्होंने स्वयं आवेदन किया और चयन के बाद कंपनी में जॉइन किया। युवतियों के अनुसार, रहने, खाने और सुरक्षा की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो बालाघाट रोजगार मेला सच्चाई को मजबूत करती हैं।
वेतन, कार्य समय और सुविधाओं पर क्या बोलीं कर्मचारी
ग्राम देवल निवासी नेहा ठाकरे, जो टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में कार्यरत हैं, ने बताया कि उन्हें समय पर वेतन प्राप्त हुआ है। आठ घंटे की शिफ्ट, निर्धारित भोजन अवकाश और हॉस्टल की व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो को भ्रामक बताते हुए कहा कि ऐसी अफवाहें अन्य युवाओं और उनके परिवारों को भ्रमित कर रही हैं।
भ्रामक वीडियो से बचने की अपील
प्रशासन और काम कर रहीं युवतियों ने युवाओं से अपील की है कि बालाघाट रोजगार मेला सच्चाई को समझते हुए केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों से दूर रहें।
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