BGT Khabar: जिले में आयोजित रोजगार मेलों को लेकर एक बार फिर रोजगार मेला धोखाधड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। रोजगार के नाम पर बाहर भेजे गए युवकों के बाद अब युवतियां भी ऑडियो-वीडियो बयानों के जरिए कथित धोखाधड़ी की कहानी बयां कर रही हैं। हट्टा क्षेत्र की रहने वाली युवती पूर्णिमा ने बताया कि उन्हें बेंगलुरु भेजने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वास्तव में उन्हें तमिलनाडु के कृष्णागिरी ले जाया गया। वहां का माहौल प्रतिकूल होने और स्वास्थ्य बिगड़ने के चलते उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया, इसके बावजूद उन्हें घर लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
स्वास्थ्य खराब, फिर भी काम का दबाव
पूर्णिमा के अनुसार, वहां पहुंचने के बाद से ही उनकी तबीयत लगातार खराब रही। सुपरवाइजर से अवकाश मांगा गया, लेकिन अनुमति नहीं मिली और बीमार हालत में भी मशीन पर काम कराया गया। एक महीने बाद वेतन मिलने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से रिजाइन दे दिया। उन्हें बताया गया था कि अगले दिन ईमेल के जरिए औपचारिक अनुमति मिल जाएगी, लेकिन न तो ईमेल आया और न ही जिम्मेदार अधिकारी फोन उठा रहे हैं।
गलत जानकारी देकर भेजने का आरोप
युवती का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि कंपनी बेंगलुरु या होसूर में है, जबकि वास्तविकता में कार्यस्थल तमिलनाडु के कृष्णागिरी में निकला। उन्होंने बताया कि वे Tata Electronics में काम करने गई थीं। खाने-पीने, नींद और व्यवहार को लेकर भी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। हॉस्टल में रह रहीं अन्य युवतियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की बात भी उन्होंने कही।
दर्जनों युवतियां प्रभावित, प्रशासन से मदद की गुहार
पूर्णिमा के मुताबिक, कुल 65 युवतियां यहां लाई गई थीं, जिनमें से आधी लौट चुकी हैं, जबकि अभी भी करीब 24 युवतियां अलग-अलग हॉस्टलों में फंसी हुई हैं। भुगतान, भोजन और सम्मानजनक व्यवहार को लेकर लगातार शिकायतें हैं। यह मामला रोजगार मेला धोखाधड़ी के आरोपों को और मजबूत करता है और प्रशासनिक निगरानी पर बड़े सवाल खड़े करता है।
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