बालाघाट: जिले के नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों में अब कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों के जरिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने की तैयारी है। ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, मुनगा रोपण और तिलहन फसलों पर आधारित योजनाएं बनाई जाएंगी। कलेक्टर आदित्य सिंह ने 19 अक्टूबर को कृषि और संबंधित विभागों की बैठक में प्रत्येक गांव के लिए उसकी जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप एक आदर्श परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
100 गांवों के लिए बनेगा Naxal Affected Villages Development Plan
कलेक्टर आदित्य सिंह ने कहा कि जिले के नक्सल प्रभावित रहे गांवों में विकास और रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों, भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।
प्रत्येक गांव के लिए कृषि एवं संबंधित गतिविधियों पर आधारित एक आदर्श प्रोजेक्ट बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग आपसी समन्वय से इन परियोजनाओं को तैयार करेंगे।
कृषि को व्यवसाय से जोड़ने पर जोर
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जिले की लगभग 70 से 80 प्रतिशत आर्थिक गतिविधियां किसानों और कृषि पर आधारित हैं। इसलिए खेती को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यवसाय और उद्यमिता से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को किसानों को नगदी फसलों, कृषि विविधीकरण और नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। इससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
मुनगा रोपण और पशुपालन से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
कलेक्टर ने आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों के माध्यम से नक्सल प्रभावित रहे गांवों में बड़े स्तर पर मुनगा के पौधे लगाने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मछली पालन, उद्यानिकी और तिलहन फसलों पर आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
इन व्यवसायों के जरिए ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिल सकते हैं। संबंधित विभागों को ऐसी योजनाएं तैयार करने के लिए कहा गया, जिनसे लोग स्थानीय स्तर पर छोटे कृषि आधारित उद्यम शुरू कर सकें।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागों को ठोस कदम उठाने होंगे।
धान खरीदी केंद्रों पर भंडारण और परिवहन की तैयारी
बैठक में खरीफ विपणन वर्ष के दौरान समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीदी केंद्रों पर जरूरी व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं।
खरीदे गए धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त गोदाम उपलब्ध कराने और खरीदी केंद्रों से गोदामों तक परिवहन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य खरीदी प्रक्रिया के दौरान अव्यवस्था रोकना और किसानों को अपनी उपज बेचने में होने वाली परेशानियों को कम करना है।
31 अक्टूबर को गोंगलई में होगा बलराम कृषि महोत्सव
कलेक्टर ने उप संचालक कृषि को 31 अक्टूबर को कृषि उपज मंडी गोंगलई में आयोजित होने वाले बलराम कृषि महोत्सव की तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। इस आयोजन के जरिए किसानों तक कृषि से जुड़ी उपयोगी जानकारी और नई तकनीकों को पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
इसके अलावा, उप संचालक मत्स्योद्योग को जिले के सभी तालाबों में मत्स्य पालन की संभावनाओं का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कहा गया। जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके मछली पालन को आजीविका और स्वरोजगार के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
फसल बीमा दावों का समय पर होगा निराकरण
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने बीमा कंपनी के अधिकारी को निर्देश दिए कि बीमारी या अन्य कारणों से प्रभावित फसलों के पात्र मामलों में बीमा दावों की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को बीमा योजना का लाभ दिलाने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए कृषि विभाग और बीमा कंपनी के बीच समन्वय जरूरी है।
ग्रामीणों की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर रहेगा फोकस
कलेक्टर आदित्य सिंह ने कृषि और संबंधित विभागों के अधिकारियों से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तैयार करने के लिए मिलकर काम करने को कहा।
विशेष रूप से नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन प्रयासों का लक्ष्य ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका के साधन विकसित करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना है।
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