BGT News: रानीकुठार गांव में आधुनिक खेती ने खेती की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। कभी केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान अब नई तकनीकों के सहारे खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लालबर्रा विकासखंड के ग्राम रानीकुठार के कृषक गोपाल सिंह सैयाम और कारी बाई वाडिवा ने आधुनिक खेती को अपनाते हुए अपने खेतों में खीरा और टमाटर की उन्नत खेती शुरू की है। नई तकनीकों के उपयोग से उन्हें बेहतर उत्पादन और अधिक आय की उम्मीद जगी है।
सरकारी योजनाओं से मिली आधुनिक खेती को नई दिशा
रानीकुठार में आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में सरकारी योजनाओं की भी अहम भूमिका रही है। यह पहल MIDH – मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर योजना के तहत संभव हो सकी है। इस योजना के माध्यम से उद्यानिकी विभाग ने किसानों को अनुदान पर ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग की सुविधा उपलब्ध कराई है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिए पौधों की जड़ों तक सीधे पानी पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और फसल की वृद्धि बेहतर होती है। वहीं मल्चिंग तकनीक से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं। इस तरह आधुनिक खेती से कम पानी में भी अच्छी पैदावार मिल रही है।

खेतों में दिखने लगा बदलाव
गांव के खेतों में लगी खीरे की हरी-भरी बेलें और टमाटर के पौधे इस बदलाव की कहानी खुद बयां करते नजर आते हैं। जहां पहले किसान केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब आधुनिक खेती के जरिए सब्जी उत्पादन की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
06 मार्च को उद्यानिकी अधिकारी कीर्ति नगपुरे ने किसानों के खेतों का दौरा कर खीरा और टमाटर की फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने फसल की स्थिति का अवलोकन करते हुए किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक तकनीकी सलाह भी दी।
ड्रिप सिंचाई से बढ़ रही उम्मीदें
निरीक्षण के दौरान कृषक गोपाल सिंह सैयाम के खेत में PMKSY – Per Drop More Crop योजना के तहत लगाए गए ड्रिप सिंचाई सिस्टम को भी देखा गया। इस तकनीक से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे पानी की बचत के साथ फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
किसानों का कहना है कि आधुनिक खेती के कारण खेती अब पहले की तुलना में आसान और अधिक लाभकारी हो गई है। कम पानी में बेहतर उत्पादन मिलने से उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।
रानीकुठार के खेतों में उग रही यह हरियाली केवल फसलों की नहीं, बल्कि किसानों की नई सोच और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक बन चुकी है। आधुनिक खेती के जरिए यहां के किसान अब खेती को एक सफल और लाभकारी व्यवसाय में बदलने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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