Balaghat News: 22 दिसंबर को बालाघाट जिले में किसानों की गंभीर समस्याओं को लेकर किसान गर्जना आंदोलन के तहत बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। किसान गर्जना संगठन के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने रैली निकालकर जिला कलेक्टरेट कार्यालय का घेराव किया और मुख्यमंत्री के नाम पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई तो आने वाले समय में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान कलेक्टरेट परिसर में जोरदार नारेबाजी हुई और प्रशासन के प्रति किसानों का आक्रोश साफ नजर आया।
बिजली संकट बना आंदोलन की वजह
संगठन की मुख्य मांगों में कृषि पंपों के लिए प्रतिदिन कम से कम 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना, बिजली की स्थायी व सार्वजनिक समय-सारणी जारी करना और सिंचाई सत्र के दौरान अघोषित कटौती तत्काल बंद करना शामिल है। इसके साथ ही जले हुए ट्रांसफार्मर, कमजोर बिजली लाइनों और तकनीकी खराबियों को 48 घंटे के भीतर सुधारने तथा किसानों को जबरन दी जा रही रात की बिजली व्यवस्था समाप्त कर दिन में बिजली देने की मांग की गई।
रात की बिजली, किसानों के लिए जानलेवा
किसान गर्जना संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी ने कहा कि अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण फसलें सूख रही हैं और किसान आर्थिक रूप से टूट रहा है। रात में बिजली आने से किसानों को जंगलों से घिरे खेतों में जाना पड़ता है, जहां शेर, चीता, भालू, जंगली सूअर और सांप-बिच्छू का खतरा बना रहता है। कई घटनाओं में किसानों की जान तक जा चुकी है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और विद्युत विभाग पर आती है।
धान कटोरा बालाघाट और सरकारी फरमान
उन्होंने कहा कि बालाघाट धान उत्पादक जिला है। सरकार ने 24 घंटे बिजली का वादा किया था, लेकिन अब दो शेड्यूल में केवल 10 घंटे बिजली दी जा रही है। इससे रबी फसल की तैयारी कर रहे किसान बुरी तरह परेशान हैं। किसान गर्जना आंदोलन के जरिए किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वे इस अन्याय को और बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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