Balaghat Update: लांजे की पूर्व विधायक और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हिना कावरे ने पद्मेश 247 से विशेष चर्चा में नक्सलवाद, बेरोजगारी और प्रदेश सरकार की नीतियों पर खुलकर अपनी बात रखी। यह लेख उसी बातचीत का सार प्रस्तुत करता है, जिसमें हिना कावरे ने सरकार के नक्सलवाद समाप्त होने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए और जमीनी हकीकत सामने रखने की कोशिश की।
नक्सलवाद पर सवाल और सरकार के दावे
हिना कावरे ने साफ शब्दों में कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि प्रदेश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उनका कहना है कि एक ओर मुख्यमंत्री नक्सलवाद के खात्मे की बात करते हैं, तो दूसरी ओर पुलिस विभाग में लगातार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिए जाते हैं। यह अपने आप में एक विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि यदि नक्सलवाद खत्म हो चुका है, तो फिर ऐसे प्रमोशन क्यों दिए जा रहे हैं।
बेरोजगारी को बताया मूल कारण
पूर्व विधायक ने नक्सलवाद की जड़ बेरोजगारी को बताया। उन्होंने कहा कि जब तक युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक नक्सलवाद जैसी समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हो सकतीं। हिना कावरे ने यह भी आरोप लगाया कि बालाघाट जिले सहित कई इलाकों में हालात पहले से ज्यादा गंभीर हुए हैं और कान्हा नेशनल पार्क जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक नक्सली गतिविधियां पहुंचना बेहद चिंता का विषय है।
राष्ट्रीय राजनीति और नई जिम्मेदारी
पंजाब चुनाव प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सचिव के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी पर हिना कावरे ने कहा कि यह उनके लिए सम्मान और चुनौती दोनों है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी।
किसान मुद्दे और सरकार की नीतियां
धान का समर्थन मूल्य ₹3100 न होने पर उन्होंने सरकार पर चुनावी वादों का आरोप लगाया। उनका कहना है कि मौजूदा सरकार केवल वोट के समय किसानों को राहत देने की राजनीति करती है। मनरेगा को लेकर भी उन्होंने कहा कि नाम बदलने से कुछ नहीं होगा, जब तक मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिलता।
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