Balaghat News: बालाघाट नगर पालिका परिषद के तत्वावधान में आयोजित एक गरिमामय समारोह में छत्रपति शिवाजी पार्क तथा बैगा संस्कृति से जुड़ी प्रतिमाओं का लोकार्पण और अनावरण किया गया। यह कार्यक्रम न केवल नगर के सौंदर्यीकरण का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता, आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी लेकर आया। इस लेख में इसी आयोजन, उसके उद्देश्य और भावनात्मक पक्ष को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
शिवाजी पार्क लोकार्पण से बढ़ी शहर की पहचान
आंबेडकर चौक पर आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता, भगवान बिरसा मुंडा और डॉ. बाबा साहब आंबेडकर के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग सदस्य मौसम बसेन, नगर पालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर, पूर्व अध्यक्ष रमेश रंगलानी, पार्षदों और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आदिवासी समाज के भूमकाल द्वारा सुमरणी पाठ और सेवा जहार के जयघोष ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।
हरियाली, स्वच्छता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश
नगर पालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि शिवाजी पार्क लोकार्पण नगर के विकास और भावनात्मक संतोष का विषय है। यह पार्क लोगों को पास में ही घूमने, वॉक करने और प्रकृति से जुड़ने का अवसर देगा। उन्होंने बताया कि शहर को हरियाली युक्त बनाने के लिए पौधारोपण और उद्यानों के पुनर्विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें नागरिकों का सहयोग भी मिल रहा है।
आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की पहल
कार्यक्रम में बैगा संस्कृति से जुड़ी प्रतिमाओं के अनावरण को आदिवासी समाज की पहचान और प्रेरणा के रूप में बताया गया। आदिवासी नेत्री हीरासनिक ने नगर पालिका के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति को समझने और अपनाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस क्षेत्र में होर्डिंग और पोस्टर न लगाने की अपील भी की, ताकि सांस्कृतिक स्वरूप सुरक्षित रहे।
समारोह के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों ने नगर पालिका अध्यक्ष का सम्मान किया। यह आयोजन यह संदेश देकर गया कि जब विकास, स्वच्छता और संस्कृति एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो शहर की पहचान और आत्मा दोनों मजबूत होती हैं।
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