Balaghat Khabar: बालाघाट जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला उन हजारों युवाओं की पीड़ा को उजागर करता है, जो सरकारी नौकरी के सपने के सहारे किसी पर भी भरोसा कर लेते हैं। यह खबर बताती है कि कैसे एक युवक ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर एक युवती को सरकारी नौकरी का झांसा दिया, उससे हजारों रुपये ऐंठ लिए और फिर अचानक गायब हो गया। शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से आहत पीड़िता को अंततः पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक जाना पड़ा, जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े हो गए।
नौकरी ठगी की शुरुआत और भरोसे का टूटना
रामपाली थाना क्षेत्र के ग्राम नवेगांव निवासी शांतनु सुलाखे ने बताया कि उनकी सहेली की पहचान सुरेंद्र कुमार दिवाकर नामक युवक से कराई गई थी। सुरेंद्र खुद को पुलिसकर्मी बताता था और दावा करता था कि वह पैसे लेकर सरकारी नौकरी लगवा सकता है। उसकी बातों में आकर युवती उससे मिली, जहां टेलीग्राम विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पहले ₹7,000 की मांग की गई।
डिजिटल भुगतान और बढ़ती मांग
आरोपी की मांग पर सितंबर में PhonePe के माध्यम से ₹7,000 ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 18 सितंबर को ₹10,000 और 27 नवंबर को ₹5,000 और भेजे गए। कुल ₹22,000 देने के बाद भी जब नौकरी नहीं लगी और पैसे वापस मांगे गए, तो आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया।
शिकायत, इंतजार और न्याय की उम्मीद
18 सितंबर को कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी गई, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। निराश होकर पीड़िता 20 दिसंबर को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची और न्याय की गुहार लगाई। यह नौकरी ठगी का मामला केवल एक युवती की कहानी नहीं, बल्कि उन सभी के लिए चेतावनी है जो झूठे वादों पर भरोसा कर बैठते हैं।
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